Tuesday, September 1, 2009

नाम

अरे ये तो कोई बात नहीं हुई
बादल थे पर बरसात नहीं हुई

हम जिंदा हैं कर दो अभी माफ़
वरना मौत के बाद ऊपर होगा इन्साफ

मैं पागल हूँ पर दिल तुम्हारा तो है साफ़
समझ सकती हो मैं हूँ प्यारा सा छोटा सा एक काफ़

कल ऑफिस आओगी तो ये पोएम पढ़के हँसना
और किसी बड़े दांत वाले को थप्पड़ ज़ोर से कसना

गुस्से को तुम भूल भी जाओ .. पानी पीलो जमकर
केस पे मेरे सोचो फ़िर तुम.. खाना थोड़ा कम कर

वेल्ला आज हूँ वेल्ला था कल वेल्ला होऊंगा मैं परसों
खाली दिमाग में डेविल ख़ुद ही उगा रहा है सरसों

शौली बोला सॉरी बोला मांगी मैंने माफ़ी
तुम्ही बताओ करू मैं क्या तुम्हे लगे जो काफ़ी

हरुआ बोलूं प्रीती बोलूं या फ़िर बोलूं प्रियंका
तुम मुझको उतनी प्यारी जितनी रावन को लंका

नाम है धुआं , नाम है धड़कन , नाम की लत नहीं जाती
नाम तो फ़िर भी नाम है प्रीती तुमसे अलग कहाँ की ?